आज बदल दी

बहुत दिनों बाद आज बिस्तर की चादर बदल दी  कमरे में कांच के टुकड़े फैले थे,आज समेट दिए जो पाँव में चुभा था, उसका ज़ख्म अभी भरा नहीं है पर भर जाएगा  आज शराब की सारी बोतलें आज बेच दी बदले में आये पैसों की आइस-क्रीम खा ली  आज बहुत दिनों बाद कमरे की खिड़की... Continue Reading →

तुम कविताएँ नहीं पढ़ते 

तुम बड़ी गाड़ी में सफ़र करते हो  स्टीयरिंग व्हील पर हाथ रखते हो तो तुम्हारी कलाई की चमचमाती घड़ी  तेज़ चलता हुआ वक़्त दिखाती है  तुम्हारी कार तुमसे बात करती है  तुम्हारी घड़ी तुमसे बात करती है  तुम सब मशीनों की सुनते हो पर अपने दिल की नहीं सुनते  जानते हो क्यों? क्योंकि तुम कविताएँ... Continue Reading →

मैं सोचता हूँ अब जो उस शहर जाऊँगा

मैं सोचता हूँ अब जो उस शहर जाऊँगा तो क्या देखूँगा, क्या खोजूँगा, क्या मैं पाऊंगा? क्या अब भी मुझे लेने वो स्टेशन आएगी? क्या अब भी मुझे देख कर वो मुस्कुराएगी? क्या अब भी उसे भीड़ में खड़ा पाऊँगा? मैं क्या देखूँगा, क्या खोजूँगा, क्या मैं पाऊंगा? क्या अब भी उसके कान में होंगी... Continue Reading →

कब तक? – हमेशा के बाद तक 

“हमें बस इतना कहना है, कि अब हमारा इंतज़ार मत करना" “...” “हम मजाक नहीं कर रहे, अमन” “जानता हूँ!” “तो मुस्कुरा क्यों रहे हो? नाराज़ हो?” “...” “नाराज़ हो लो, पर ऐसे मुस्कुरा के मत देखो" “...” “कुछ तो बोलो" “दिल के मेरे पास हो कितनी, फिर भी हो कितनी दूर तुम मुझसे, मैं... Continue Reading →

तराजू

बड़े बड़े सच बड़ी बड़ी बातें पच्चीस सालों का अनुभव सैकड़ों किताबों का ज्ञान लाखों सालों का मानव विकास तुम्हें समझने की समझ सारी अक्ल, सारा विवेक, सारी होशियारी, सारी तैयारी सब का सब एक तरफ और दूसरी तरफ इतना सा सच कि तुमने मुझे नहीं चुना अब बताओ मैं किस तरफ झुक रहा हूँ?... Continue Reading →

वक़्त की रफ्तार

जैसे बहुत तेज़ दौड़ने के बाद साँसें तेज़ हो जाती हैंदिल फटने की हालत में हो आता हैशरीर पसीना-पसीना और साँसें गर्म हो जाती हैंआँखों के आगे एक हल्का धुंधलका छा जाता हैपैर सुन्न होकर डगमगाने लगते हैंफिर भी मंजिल की ओर घसीटे जाते हैंधीरे धीरे, थके हुए ठीक वैसा ही मेरा वक़्त है अबतुम्हारे... Continue Reading →

तुम आओगी 

ओस की बूँदें जो कहीं से कूदती हुई आती हैं ज़मीन की कोख में छुप जाने को  पर मिट्टी में सोने से पहले बैठती हैं पत्तों पर  और फिर सरकते सरकते गिर जाती हैं ज़मीन की गोद में  वैसे ही इन आँखों से जो आँसू निकलते हैं  वो सीधे रुमाल की नर्म सूती परत पर... Continue Reading →

तुम मेरी उम्मीद थी, तुम ही मेरी मनमीत थी 

तुम मेरी उम्मीद थी, तुम ही मेरी मनमीत थी  जिस मोड़ से तुम मुड़ गयी, उस पर मेरी तकदीर थी तुम कीर्तियों का सार थी तुम ही मेरा आकार थी  तुम प्रेम की थी परिभाषा तुम ही मेरा प्राकार थी  तुम मेरे उजड़े मधुबन में  थी एकमात्र हँसता कुसुम  मेरी अयोग्य लिखावट में  थी सुन्दर... Continue Reading →

तुझे प्रेम करूँ

तुझे प्रेम करूँ और जताऊं भी तुझे चाहूँ बहुत और बताऊं भी तेरा सजदा करूँ और दिखाऊँ भी तेरा सदका करूँ और जताऊं भी तुझे नज़्मों में उतारूँ और खुद जैसा बनाऊं तेरा ज़िक्र करूँ और रोटी पाऊं ऐसा चाहूँ भी तो क्या ख़ाक चाहूँ! ऐसा पाऊं भी तो क्या ख़ाक पाऊं! इससे बेहतर तो... Continue Reading →

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